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गुलाबी परी की कहानी, Gulabi pari ki kahani



ख़ुशी को रात को सोने से पहले कहानी सुनने का बहुत शौक है। वह कक्षा चार में पढ़ती है, वह अपनी माँ से कहती है- “माँ" आज रात मुझे कहानी सुनाओगी न,

माँ कहती है- “हाँ बेटा! अभी कुछ देर रुको। मैं रसोई का काम ख़त्म करके जल्दी ही आती हूँ।”



अब ख़ुशी ने- जल्दी से नाईट सूट पहना और अपने पलंग पर आकर लेट गई।

थोड़ी देर में माँ का काम ख़त्म हुआ तो वो भी उसके पास आ कर लेट गईं|

माँ बोलीं- “हाँ! अब बताओ कौन सी कहानी सुनाऊँ आज?”

ख़ुशी बोली-“माँ, आज वो परियों वाली कहानी सुनाओ न,” ख़ुशी को परियों की कहानी सुनना बहुत पसंद है। वह हर तीसरे दिन कोई न कोई परियों वाली ही कहानी सुनना चाहती है।



माँ बोलीं-“अच्छा चलो, आज मैं तुम्हें गुलाबी परी की कहानी सुनाती हूँ,” माँ ने कहानी शुरू की –

“बहुत समय पहले की बात है, परीलोक में बहुत सारी परियाँ रहती थीं। उनमें से गुलाबी परी सबसे प्यारी थी। वह रानी परी की सबसे चहेती परी भी थी। गुलाबी परी यदि कोई इच्छा करती तो वह उसे ज़रूर पूरा करती।

एक दिन खेलते–खेलते गुलाबी परी के मन में आया कि क्यों न पृथ्वीलोक पर सैर के लिए जाया जाए। उसने पृथ्वीलोक और वहां के लोगों के बारे में बहुत सुना हुआ था। वे लोग कैसे रहते हैं, वह जानना चाहती थी। उसने अपनी यह इच्छा रानी परी के सामने रखी। पहले तो रानी परी ने ना-नुकुर किया फिर मान गई। आखिर वह गुलाबी परी की इच्छा को कैसे टाल सकती थी।



रानी परी ने कहा, “पर मेरी एक शर्त है। पृथ्वीलोक पर तुम सिर्फ रात में ही जा सकती हो। और सूरज की पहली किरण निकलने से पहले ही तुम्हें वापस आना होगा। सूरज की किरणें तुम्हारे ऊपर नहीं पड़नी चाहिए। नहीं तो तुम्हारे पंख पिघल जाएंगे और तुम वापस नहीं आ पाओगी। तुम्हें हमेशा के लिए मनुष्यों के साथ रहना पड़ेगा।”

गुलाबी परी ने जल्दी से कहा- “ठीक है!”वह तो पृथ्वीलोक पर जाने के नाम से ही उत्साहित थी।

रानी परी ने कहा- “लेकिन तुम अकेले नहीं जाओगी। तुम्हारे साथ तुम्हारी तीन और परी बहनें भी तुम्हारी सुरक्षा के लिए जाएंगी। सब्ज़ परी, नील परी और लाल परी,”।



गुलाबी परी और भी खुश हो गई। “ये सब तो मेरी सहेलियाँ हैं! अब तो और भी मज़ा आएगा। हम सब वहाँ जा कर मज़े करेंगे, किसी बाग़ में खेलेंगे और नृत्य करेंगे।” बाक़ी परियाँ भी बहुत खुश हो गईं, आखिर उनको भी पृथ्वीलोक पर जाने का मौका मिल रहा था। वे सब रात का बेसब्री से इंतज़ार करने लगीं।

जैसे ही पृथ्वीलोक पर अँधेरा छाया, चारों परियाँ तैयार हो गईं। रानी परी ने एक बार फिर से अपनी चेतावनी दोहराई, “याद रहे, सूरज की पहली किरण निकलने से पहले ही परीलोक वापस आना होगा।” फिर रानी माँ ने सभी परियों को आँखें बंद करने को कहा।



थोड़ी देर बाद जब चारों परियों ने आँखें खोलीं तो वे सब एक हरे भरे बाग़ में थीं। चारों तरफ सुन्दर-सुन्दर फूल खिले हुए थे। तितलियाँ फूलों पर मंडरा रहीं थीं। हवा में ठंडक थी। उन परियों को ये हरियाली इतनी अच्छी लगी कि उन्होंने नाचना शुरू कर दिया। धीमा-धीमा संगीत न जाने कहाँ से आ रहा था।”

कहानी खत्म हुई और ख़ुशी को अपनी माँ कि गोद में ही कहानी सुनते - सुनते नीद आ गई|






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